Sunday, August 14, 2011

परमेश्‍वर को सदा धन्‍य कहना (भजन 103: 1-5 )


पाठ – भजन 103: 1-5 
प्रचारक – डॉ. डामिनिक मारबनियांग 
स्‍थान – बुढार 
Psa 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!
Psa 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
Psa 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगोंको चंगा करता है,
Psa 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,
Psa 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थोंसे तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।।
परमेश्‍वर को सदा धन्‍य कहना।
अपने मन को आदेश दें की मन परमेश्‍वर को धन्‍य कहें
- क्‍योंकि मन सब से अधिक धोखा देने वाला है
- कयोंकि मन परमेश्‍वर को धन्‍यवाद देने से पीछे हट जाता है
परमेश्‍वर को धन्‍य कहना है
- सम्‍पूर्णता से. जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! यदि कुछ हममे ऐसा है जो उसके पवित्र नाम को धन्‍य नही कह सकता तो आज सम्‍पूर्ण समर्पण की आवश्‍यक्‍ता है।
- स्‍मरण करके. उसके किसी उपकार को न भूलना। अपने आप को उसकी भलाई याद दिलाने से स्‍वयं में गवाही होता है जिससे विश्‍वास मजबूत होता है। याद रखें कि वह हमारे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है। जब निराशा और अविश्‍वास का बादल छा जाएं तो अपने मुकुट को याद रखें।
परमेश्‍वर की आशीषें
  1. क्षमा - वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता

  2. स्‍वास्‍थ्‍य, सेहत - तेरे सब रोगोंको चंगा करता है

  3. सुरक्षा - वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है

  4. संतुष्टि - वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थोंसे तृप्त करता है

वह हमें सम्‍पूर्ण रीति से आशीषित करता है। इसलिए आईए हम सम्‍पूर्ण जीवन से और उसके भलाईयों को स्‍मरण करते हुए उसे धन्‍य कहते रहेा

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