Wednesday, January 2, 2013

पवित्र आत्‍मा



बाईबल में पवित्र आत्‍मा का वर्णन कई नामों से किया गया है, जैसे “परमेश्‍वर का आत्‍मा” (उत्‍प.1:2), “सत्‍य का आत्‍मा” (यूह.14:17), “पवित्र आत्‍मा” (लूका 11:13), “पवित्रता की आत्‍मा” (रोम.1:4), एवं “सहायक” (यूह.14:26) पवित्र आत्‍मा सारे वस्‍तुओं का सृष्टिकर्ता एवं जीवन का दाता हैं (अय्यूब 33:4; भजन 104:30) उसी ने पवित्र शास्‍त्र की लेखन को प्रेरणा दिया (2पत.1:21) उसी के द्वारा जगत में परमेश्‍वर के अद्भुत वरदान परमेश्‍वर के लोगों के द्वारा प्रगट होते हैं (1शम.10:10; प्रेरित 10:38; 1कुरु.12) वह आत्मिक बातों की समझ देता है (अय्यूब 32:8; यश.11:2) वह परमेश्‍वर के दासों को अभिषिक्‍त करता है और उन्‍हे सेवकाई के लिए अलग करता है (प्रेरित 10:38; 1यूह.2:27) वह यीशु मसीह का महान गवाह है जो संसार को पाप, धार्मिकता, एवं न्‍याय के विषय में निरुत्‍तर करता है (यूह.15:26; 16:8) उसी के अंतरनिवास की परिपूर्णता (उससे भरे जाने) के द्वारा शिष्‍य सारे विश्‍व में मसीह के गवाह होने की सामर्थ प्राप्‍त करते हैं (प्रेरित 1:8) 
पवित्रात्‍मा का बपतिस्‍मा
बपतिस्‍मायुनानी शब्‍द बपतीजो से आता है जिसका अर्थ है डुबाना। इस शब्‍द का प्रयोग बर्तनों या कपडों को डुबो कर धोने के लिए किया जाता था। पवित्रात्‍मा का बपतिस्‍मा का अर्थ है पवित्रात्‍मा में डुबाया जाना और उससे भरा जाना जिसके द्वारा हम उसके सामर्थ से ढ़के जाने का प्रथम अनुभव पाते है। यह बपतिस्‍मा कोई इनसान नही वरन् यीशु मसीह ही स्‍वयं देता है (प्रेरित 2:4, लूका 24:49)
बाईबल बताती है की पवित्रात्‍मा का वरदान हर विश्‍वास करने वालों के लिए है  (प्रेरित 2:38)

प्रभु यीशु मसीह ने पुकार कर कहा कि जो कोई प्‍यासा है वह उसके पास आये और आत्‍मा को पाले जो उसमे जीवन की जल की नदियों का सोता होगा (यूह 7:38, 39)
प्रभु ने कहा की जब हम पवित्रात्‍मा को प्राप्‍त करेंगे तब हम सामर्थ को प्राप्‍त करेंगे और हम प्रभु के गवह संसार के छोर छोर तक होंगे (प्रेरित 1:8)
पवित्रात्‍मा का बपतिस्‍मादाता प्रभु यीशु मसीह स्‍वयं है (मत्ति 3:11)
नया नियम में हम देखते है कि जब कभी लोग पवित्रात्‍मा से भर गए तब वे अन्‍य अन्‍य भाषा में प्रार्थना करने लगे। (प्रेरित 2:4, 10:46, 19:6)
पवित्रात्‍मा का बपतिस्‍मा हमें मसीह की गवाही में हियाव और बल प्रदान करता है। वह हमें आत्‍मा के साथ प्रार्थना करने का वरदान प्रदान करता है। वह हमें आत्‍मा से भरपूर होकर आत्‍मा की भरपूरी में चलने की सामर्थ प्रदान करता है।

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