धर्मविज्ञान का अर्थ, आवश्‍यक्‍ता, विभाग

धर्मविज्ञान का अर्थ
धर्मविज्ञान मसीही सिद्धांत एवं विश्वास का अध्ययन है। इसका उद्देष्य मसीही धर्मविज्ञान की विषयबद्ध व्याखया देना होता है।

धर्मविज्ञान की आवश्‍यक्‍ता
1. विश्‍वास की स्पष्ट समझ हेतु
2. विश्‍वास का बौद्धिक एवं सुस्पष्ट मंडन हेतु (1Pet. 3:15)
3. परमेश्‍वर द्वारा प्रकाशित सत्यों का सुव्यवस्थित प्रस्तुति हेतु (2 Tim. 2:15)
4. अपसिद्धांत एवं गलत शिक्षाओं से सुरक्षा हेतु (Mat. 22:29; Gal. 1:6-9; 2Ti. 4:2-4)
5. मसीहियों की आत्मिक उन्‍नति एवं परिपक्वता (Eph. 4:14)

धर्मविज्ञान के विभाग
1. बाइबिलीय (Exegetical) धर्मविज्ञानः इसका अध्ययन अक्सर पुराने नियम का धर्मविज्ञान एवं नए नियम का धर्मविज्ञान के रूप में और बाइबिल की व्याख्या पर आधारित होता है।
2. ऐतिहासिक धर्मविज्ञानः धर्मविज्ञान के दृष्टिकोणों का ऐतिहासिक रूप में उत्पत्ति एवं विकास का अध्ययन।
3. विषयबद्ध धर्मविज्ञानः इसमें हम धर्मविज्ञान के विषयों का व्यवस्थित अध्ययन करते हैं।
4. व्यावहारिक धर्मविज्ञानः धर्मविज्ञान का अनुप्रयोग, विषयः प्रचारशास्त्र, पास्तरीय विज्ञान, मसीही शिक्षा, आराधना, सुसमाचार प्रचार, कलीसिया गठन एवं प्रबंधन।

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