Saturday, November 29, 2014

क्रूस


Pagan Constantine – 312 AD.. According to Lactantius, in dream advised to mark the heavenly sign on the shields of soldiers…
According to Eusebius, while marching at midday,”he saw with his own eyes in the heavens a trophy of the cross arising from the light of the sun, carrying the message, “With this sign, you will conquer”, then had a dream the following night in which Christ appeared with the same sign and told him to make a standard… (Chi. Ro.. XP).

पराजय- जय
लज्‍जा – महिमा
दण्‍ड – आनंद (Sadhu Sundar Singh -  “The Cross bears those who bear the cross”)
A. मृत्‍यु का स्‍थान
1. मसीहा की मृत्‍यु
Daniel 9:24-26 फिर बासठ सप्ताहों के बीतने पर चौक और खाई समेत वह नगर कष्ट के समय में फिर बसाया जाएगा। और उन बासठ सप्ताहों के बीतने पर अभिषिक्त पुरूष काटा जाएगा: और उसके हाथ कुछ न लगेगा (but not for Himself
Rom 5:6 - क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Rom 5:8 - परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।

2. मसीही की मृत्‍यु
-- पुराने  मनुष्‍यत्‍व की
Rom.6:6 - हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया
पुराने विचार, सोच, चालचलन, छवी- यदी murderer, अब वह क्रूस पर, वैश्‍या मसीह में नई सृष्टि
-- शरीर की अभिलाषाओं की
Gal 5:24 - और जो मसीह यीशु के हैं, उन्हों ने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषों समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है
जो पहले पसंद था अब घृणित (alcohol, bad language…)
-- संसार के प्रति और संसार मसीही के प्रति
Gal 6:14 - प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिस के द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं।
Not to please world

B. मेलमिलाप का स्‍थान
1- परमेश्‍वर के साथ शान्ति (Rom.5:1;
Col.1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप करके, सब वस्तुओं को उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। ईश्‍वर ने इनसान को स्‍वीकार किया

2- ईश्‍वर ने इनसान और इनसान के बीच मेल और शान्ति किया
(Eph.2:14अलग करनेवाल दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया।) Destroyed Enmity (v16)

C. मुक्ति का स्‍थान
- श्राप से मुक्ति (Gal.3:13)
- पापों से मुक्ति (Matt 26:28 – लोहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है)
- पाप से मुक्ति (Rom. 6:7 क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा)
- व्‍यर्थ चालचलन से मुक्ति (1Pet.1:18,19 निकम्मा चाल- चलन जो बापदादों से चला आता है)
- शैतान से मुक्ति (Heb.2:14,15 मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात् शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले।
- मृत्‍युसे मुक्ति(Rom.8:1,2)
Rom. 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?(Saved by His Life)
मृत्‍यु का स्‍थान
मेलमिलाप का स्‍थान
मुक्ति का स्‍थान


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